Monday, 5 April 2021

क्योंकि सर सलामत, तो पगडी पचास..

"नो लाॅकडाऊन" के नारे लगाने से कोरोना का स्प्रेड रुक जाएगा क्या??

सरकार के निर्बंध हटाने से कोरोना का खौफ हट जाएगा क्या??

बिझनेस लाॅस की बाते सुनाकर, जान पर आयी मुसीबत टल जाएगी क्या??


दोस्तों, ये समय मुनाफ़े और नुकसान के बारें में सोचने का नहीं..

माना, बैंक लोन के हफ्ते है, घर के, शाॅप के किराए है, रोज मर्रा के कईं खर्चे है, पैसे की दिक्कत तो आएगी..

पर, कमाने के चक्कर मे जान जोखिम में डालना, क्या सही होगा??

अपने और अपने फैमिली की सुरक्षा को नजरअंदाज करना, क्या सही होगा??

आपसे ही मुस्कुराहट है आपके अपनों के चहरे पर, उसे दांव पर लगाना, क्या सही होगा??

सरकार के निर्बंध पर टिप्पणीया करने से पहले जरा सोचो, सरकार की नजर में आप महज एक नंबर हो.. आपको कुछ हो गया तो सरकार को कितना ही फर्क पडना है..

पर एक दफा अपने फैमिली के और देखिए, आपको खो दिया तो उनके पास क्या बचेगा..

लाॅकडाऊन आपको टाॅर्चर करने के लिए नही, आपको सेफ रखने के लिए है..

आपकी जान बचाने की सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही है और आप जान हथेली पर लेकर घुमना चाहते है.. इसे ना समझी की हद ना कहें तो और क्या कहें??

Friday, 26 March 2021

Call a friend for No reason..


We have 100s of friends in our contact list.. There was a time when we knew them in n out... but now when we hear their names, we wonder what they might be up to these days..

नहीं पता हमें, वो कैसे है, किस हालात में है..

जब तक जरूरत नहीं पडती तब तक बातें करना तो दूर hi-hello जितना भी contact कहाँ होता है..

याद नहीं मुझे, पिछली बार कब किसी दोस्त से यूहीं बेमतलब बात की हो.. याद नहीं मुझे, पिछली बार कब बस हाल चाल जानने के लिए पहल की हो..

We are just a click away from each other, पर फासले फिरभी कितने हैं ?

Everything is on our finger toe, पर फिर भी अज्ञान कितना हैं ?

We have so many social platforms जहा हम घंटों active रहते है.. पर हममें से सच मेें socially active कितने है?

Everyone has their profiles, walls and status bars.. पर हम फिर भी उन्हे जानते ही कितना है ?

We have a wide network today.. but we still lack in connections.. what an irony it is..!

If you think it's true and needs to be changed, Let's start

Let's be more social in real lives than just on FB or Insta.. 

Let's recreate the bonds we cherished some years back..

Let's not be so self centered and agenda driven..

Let's talk for asking no favors.. but just for the sake of the talk..

Let's connect to our contacts.. Let's call a friend for no reason..

Tuesday, 1 September 2020

"सही वक्त"



 20 तक पढाई - 23 तक सेटलमेंट - 25 तक शादी - 28 तक बच्चे
इसे वे सही वक्त कहते हैं ..।
"समय रहते सब हो जाएँ तो बेहतर है..", ऐसी सोच रखते हैं.. 
खैर इसमें कोई खराबी नहीं ।
पर "जो इस सोच से परे है वे गलत" इस बात से मुझे परेशानी हैं।

सही समय की पाबंदी मिडीऑकर रखते हैं, 
जिनकी राहे औरों से जुदा है, उनके रास्ते आम नहीं हो सकते।
जिनके सपने बड़े होते हैं, वे बाॅक्स के अंदर खडे नहीं होते ।

"हाँ, सत्ताइस की हूँ और अब भी कुँवारी हूँ..।"
क्योंकि, मेरे मम्मा पापा ने मुझे दुनिया की तौर तरीकों से बडा नहीं किया..
लडकी हूँ इस बात का हर घड़ी एहसास नहीं दिलाया..
उन्होंने मुझे साॅफ्ट स्पोकन येट अ डिसीजन मेकर बनाया..
पोलाईटनेस के साथ प्राइड भी सिखाया..

देखो भाई, सिंपल सी बात है..
"एक्सट्रा ऑर्डीनरी पॅरेंटींग रेजेस् एक्सट्रा ऑर्डीनरी किडस्
एन्ड एक्सट्रा ऑर्डीनरी पीपल डोन्ट लीड एन ऑर्डीनरी लाईफ"
सो, आय डोन्ट बिलीव्ह इन "सही वक्त" स्टफ

माय फंडा इज-
• किसी और के नाम से जुड़ने से पहले, अपना नाम तो कमालु..
• किसी और की अर्धांगनी बनने से पहले, पुरी तरह अपनी तो हो लू..
• कल संकट की घड़ी में उसके कंधे से कंधा लगा सकूं,
खुद को उतना क़ाबिल तो बना लु..
• कल जितने अभिमान से मैं उसे अपने दोस्तों से मिलांऊ,
उतने अभिमान का हकदार अपने आप को भी तो बनाऊं..
भाई, चार पहियों की गाडी है ये,
एसयुव्ही के दो पहियों से स्कुटी के पहियें कैसे लगाऊं..??

मेरी 👆 बात हर किसी के पल्ले पड़ेगी.. ऐसी उम्मीद भी नही है..
क्योंकि, चांद को देखने के लिए स्पेसशीप ना सही,
पर एटलीस्ट एस्ट्रोनाॅमी बायनॅकुलर्स तो चाहिए ना..

डिअर पॅरेन्टस्, 
अगर सही मायने में अपने बच्चों का भला चाहते हो तो 
सही वक्त नही सही परवरिश की मिसाल रखें..
उन्हें आजादी दे, रिस्पाॅसीबीलीटी का एहसास उन्हें अपने आप होगा..
आप उन्हें चीजों के सही-गलत पैमाने जरूर बताएं..
पर फैसले लेने का हक़ मत छीनें..
अगर अपनी परवरिश पर भरोसा है, तो उनके फैसलोंपर भी भरोसा रखिए ..
कल जाके वे गलत भी साबित हो तो उसका जिम्मा खुद लेंगे
ना की जिंदगी भर आपको कोसेंगे..।

अपने बच्चों को इस "सही वक्त" के सोशल प्रेशर से दूर रखें
क्योंकि सही बात के लिए कोई सही वक्त नहीं होता,
और सिर्फ वक्त देखकर लिया फैसला हमेशा सही नहीं होता..।

Tuesday, 28 April 2020

कहाणी लाॅकडाऊन की


“सपनों का शहर सो रहा है”, ऐसा तो पहली बार ही हो रहा हैं। घड़ीके काटों पर जो भगाता था, वो वक्त लगता है जैसे थमसा गया है।
"आजादी" खोई इस महामारीके दौरमें, पर काफी कुछ पाया भी हैं। रोजगार गवाया है, पर फिरभी कुछ कमाया है।

ईंट से ईंट जोड़कर मकान बना लिया था, आज पुरा परिवार साथमें बैठा तो “घर” बन गया। 
जिन्होंने खो दिया था बचपन, रोज मर्राकी जिंदगीके चलते, वे दिखाई देते है बच्चोंके साथ खेलते। मानो जैसे जिंदगीने दुसरा मौका दिया हो, अनमोल लम्होंको फिरसे जीने के लिए। 
भूक लगने पर जो उंगलियां मोबाइलपर घूमती, वो आजकल आटा गुनने लगी हैं। नेटफ्लिक्स, प्राईम व्हिडीओ की जनरेशन यूट्यूब पर दादी की रेसीपी ढूंढने लगी हैं। 
बच्चे पालनाघरमें नहीं, अपने घरोंमें खेल रहें हैं। A-B-C-D नहीं, रामायण-महाभारत के पाठ पढ़ रहें है।

वैसे देखा जाए तो, सुनहरी है ये कैद, पर "जबरदस्ती" रास कहाँ आती है, फिर वो आराम की ही क्यूँ ना हो। तभी तो आरामसे दुनिया थक गयी हैं, जिससे फ़ुरसत चाहते थे, उसी काम की कमी खल रही हैं।

विपदाकी घड़ीमें इन्सान की नस्ल का अनोखा परिचय हो रहा है। कहीं “संयम का पालन”, कहीं “मूर्खता का प्रदर्शन” हो रहा है। कोई जान बचाने में जुटा है, कोई लुटाने पर अड़ा है, कुछ अपनों से दूर हैं कर्तव्यपालन के लिए, वहीं ऐसे भी हैं कुछ अक्ल के अंधे, जो अपनेही घर में नहीं रह पाते। 

खैर “आगे क्या होगा?” ये तो वक्त ही बताएगा, “पर कब?” ये सवाल हर वक्त सताएगा।

Wednesday, 8 April 2020

लग्न- नातं कि बंधन..


मैत्री चं स्थान या जगात इतकं उच्च का आहे माहितीये??
कारण ती रंग-वर्ण, जात-पात बघून जोडली जात नाही तर स्वभाव आणि विचारांवर आधारलेली असते..

तिथे सौदा नसतो, ती अगदी साधी असते,
तिथे औदा न बघता परस्पर आदर जपला जातो.
ती निखळ असते, निर्विकार असते..
जिथे कृष्ण राजा नसतो, सुदामा शूद्र नसतो ती एकमात्र मैत्री असते.

मैत्री ची जागा कोणतंच नातं घेऊ शकत नाही.
कारण ती नाळेनं जोडली, म्हणून सख्खी असत नाही.
ती जन्मजात मिळत नाही... मन जिंकून जोडावी लागते...
ती जबरदस्ती बांधलेलं बंधन नसते, ती मनापासून निभावलेलं नातं असते...

मग प्रश्न पडतो कि आयुष्यभर जे नातं जपायचंय ते "लग्न", मैत्रीत करावं कि नातलगात??
जिथे नाडी-पत्रिका जुळते तिथे बांधावं कि जिथे मनं जुळतात तिथे जोडावं??
जिथे जात मिळते तिथे टिकेल कि जिथे स्वभाव आणि विचार जुळतात तिथे बहरेल??

सगळ्या गोष्टी चोखंदळासारखे निवडणारे आपण स्टेटस लेबलस् आणि जातीचे टॅगज् बघून "लग्न बंधन" जोडतो हे विडंबन नाही तर काय??
माणूस म्हणून पारख करण्यापूर्वीच जे वर्थलेस फिल्टरस् आपण लावतो त्याने काय साध्य करतो??

अहो, मनं तोडून घरं जोडली जातात का कधी??
लग्न प्रतिष्ठेसाठी नव्हे तर पूरकतेसाठी करायला हवं.. ज्याला दोन जीवांचा मेळ म्हटलं जातं ते कुणाच्या अंतर्मनाच्या राखेची साक्ष देत असेल तर काय अर्थ त्या नवजीवनाला??

Friday, 22 November 2019

जागो ग्राहक जागो..


Dear Girlfriends,
Cosmetics का बढ़ता व्यापार हमारे Low Self Esteem का प्रतिबिम्ब है..

ये Fair skin का obsession क्या सचमें सही है ??
तुम क्यों भूल जाती हो कि तुम हर रंग मैं खुबसूरत हो,
क्योंकि खुबसूरती का कोई रंग नहीं होता..

But again तुम कोई मूरत तो नहीं जिसकी बस सुरत अच्छी होनी चाहिए...
रंग रूप के परें भी तुम्हारा एक वजूद है...
"ऊंचा कद" और "पतली कमर" से उपर बढकर तो देखो
तुम्हारी height and weight क्या बस इतने ही पैमाने है तुम्हें मापने के?

कुछ चीजे genetic होती है...
उनपर तुम्हारा बस नहीं...
Healthy होने का मतलब slim trim body इतना ही नहीं होता..
अच्छी eating habits और exercising बेशक good choice हैं
पर उपरी personality के अलावा भी एक health हैं..
जिसे हम mental health कहते है

मेरी जान, तेरे लबों पर लिपस्टिक से ज्यादा, हँसी जचती है..
आखोंमें काजल-सुरमे से ज्यादा, ख्वाब खुबसूरत लगते है...
तेरी आवाज़ सुरीली हो न हो... उसमें दम होना जरूरी है...

तुम्हें सभी यही जताएंगे कि कैसे तुम्हें खुद की appearance improve करने की जरूरत है..
जान लो.. ये बस एक बिजनेस स्ट्रॅटेजी है..

ज्वेलर्स यकीन दिलाएंगे की, "हिरा पहनलो तो तुम हिरोंसी चमकोगी"
पर *shine तुममें है*... बस उसे पहचानो, ये राज वो कभी नहीं बताएंगे..

Health suppliments बेचने वाले तुम्हें जाने कितनी बीमारियाँ गिनवाएंगे... दो चार दस किलो वजन कम करवाने की पूरी पूरी गॅरंटी देंगे...
तुम्हारे dream dress से लेके dream boy तक सब उनकी supplements से ही मुमकिन है ये बात तुमसे मनवा ही लेंगे...

तुम्हारी dressing ही तुम्हें star बनाती है कहकर मेहंगी dresses से wardrobe भर जाएंगे पर glammer को हासिल करनेमें तुम फिर से नाकामयाब हो जाओगी

Fairness cream वालों ने कहा "fair हो जाओ, तो job लग जायेगी.."
Detergent वालों ने दिखाया "चमकदार कपडोंसे तुम boss की नजर में आओगी.."
तो भाई, हम ये college-university जाते ही क्यूँ है??

Perfume/body spray से लड़कियाँ या लड़के पट जाते है तो हम कम्बख्त, इश्क़ करते ही क्यूँ है??

Soft drinks वालोंका अलग ही फंडा है.. पता नहीं दस रूपय की बोटल के लिए चट्टान से कूदते क्यूँ है...??

एक पिंपल आ जाने पर वो इतना hyper होते हैं जैसे कि तुफान आ चला हो..
Hormonal changes होते हैं भाई, अब क्या law of nature भी गलत है??

Sanitary napkins वाले कहते हैं, "Periods के दौरान भी भागादौडी करो, हमारे pads संभाल लेंगे.."
But my darling, ये exertion तुम्हें आगे जाकर मेहंगा पड सकता है उसका क्या..??
4 दिन आराम करने से तुम्हारी मंजिल कोई मिलों दूर तो नहीं चली जाएगी.. तो जरा chill ना..

Isn't it ironic?
ये Fastfood की tempting ads बनाकर ये हमें पहले गलत खाना सिखाते हैं,
फिर "muscle gain and bone density" के लिए tablets and milk powders बेचते हैं..

सोचो दोस्तों,
हमारे health के साथ खिलवाड़ करकर वो अपनी wealth कमा रहे हैं..
कोई protest वगैरा नहीं करना है, हमें अपने लिए बस सही चुनना है..

"फल भी seasonal ही खाने चाहिये" ये मानने वाले हम, oats जैसी चीज जिसकी उपज तक हमारे देश में नहीं होती उसे अपना बनाए बैठे हैं..

दोस्तो, एक fridge की ad आपने देखी होगी जिसमे 15 दिन टमाटर बिलकुल fresh रखनेका दावा किया है..
पर एक बात बताओ, इतना स्टोअर ही क्यूँ करें????
रोज office से आते वक्त एक ताजी सब्जी लेकर आने में कोनसी बडी दिक्कत है..?

Frozen food की nutrition value एक वक्त बाद zero हो जाती है और इसी वजह से हमारे शरीर में पोषकतत्वों की कमी पाई जाती है..
जिसके solution में हमें फिर नई problem परौसी जाती है..

अपनी सेहत की सलामती के लिए कुछ ज्यादा भी नहीं करना हैं
बस packaged food की जगह fresh food ले आइये..
कम से कम process कर खाना बनाइये..
सब साथ मिलकर खाईये..
क्योंकि अपनों के साथ वक्त बिताएंगे तो depression से बचे रहेंगे.. no pills required..

आपकी परेशानीयोंका व्यापार हो रहा है.. और व्यापार में मुनाफा बार बार बेचने पर मिलता है तो आपकी समस्या तो वो एक बार में हल करने से रहें..
       ये बात तो पक्की है..🤷🏻‍♀

Ps: Reason to write this-
Marketing वालोंकी पोल, Marketing वाली ही खोल सकती है..😉

Tuesday, 6 November 2018

Happy Heart is an Art...

We have been planning Diwali for like weeks....

Cleaned up our house, each corner of it..
Washed out all the cloths, bedsheets, blankets, and like every damn thing...
Groomed ourself to get the best look... the best dress...all matching stuff we took...

But have we cleaned up the misunderstanding we had?
Have we washed off the memories that suck us all day long??
Did we dig up to find the passionate self in us?
Like we strived to find the matching stuff??

Rather than make-up, that looks like made up, did we try to eat good things that groom us from inside..?
Did try to connect with our souls, before wishing everyone world wide..?

Happiness comes from within... But we are all occupied with the outside world...
where we don't even talk about "us", we are just busy in discussing the third.

This diwali, light up the happy lamp in your mind
It won't be blown up by any wind...

Wish you a Happy Heart Diwali...